रविवार, 11 मार्च 2018
सोमवार, 12 फ़रवरी 2018
दो दिनों से इंटरनेट पर छाईं प्रिया प्रकाश के नाम इंडिया न्यूज के युवा पत्रकार आकाश वत्स का खुला खत
प्रिया प्रकाश वारियर के नाम बधाई खत,
प्रिय, प्रिया प्रकाश. सबसे पहले आपको ढेरों
शुभकामनाएं और बधाई, चुकि इंटरनेट पर वायरल होने वाला ही आज
कल असल में नायक है और हकीकत यही है कि आप आज इंटरनेट की असली नायिका हैं. दक्षिण
की आप एकलौती अभिनेत्री हैं जिसने 72 घंटे में ही समूचे
उत्तर भारत के युवा दिलों की घंटी को एक साथ बजा दिया है. आपको पुन: बधाई. पहली
बार में 26 सेकेंड का मस्त-ए-निगाह वाला वायरल वीडियो देखकर
मैं भी घायल सा हुआ पर स्कूल से विदा लिए 14 साल हो गए हैं
तो कुछ देर में संभल गया.
माहौल भी भला वैलेंटाइन वीक का है, ऐसे में ये नाज़-अंदाज़-नख़रे-रूमानियत-अदा-ख़ामोशी-आंख-भौंह की बात
ज्यादा चल रही है, इसी बीच वीडियो सामने आया तो समझिए कि
दिलों में आग ही लग गई. आपकी आतिश कदह निगाहें इस वैलेंटाइन में नाउम्मीद हुए आशिक
के लिए अमृत का काम कर गई. वैसे, अभिनय इसी का नाम है जो
लोगों को उसकी हकीकत से परिचय करा दे. आप इसमें सफल हो गई हैं. आपको फिर से बधाई.
देखते ही देखते पूरा भारत आपका नाम जान गया,
लेकिन मुझे उस लड़के का नाम नहीं मालूम चल रहा जो आपकी आंखों की अदा
को देखकर दोस्त के कंधे पर ही अपनी जान को टिका देता है. धीरे-धीरे हर एक बात
मालूम चली कि ये किसी मलयालम फिल्म का गीत का हिस्सा है. फिर आपकी उम्र, आपकी शिक्षा, आपकी पसंद कमोबेस आपकी हर एक बात से हर
कोई वाकिफ हो चुका है.
आंखों की इस शालिन भाषा में हर कोई स्कूल के दौर में बात किया ही
होगा, मेरी आंखों में तेरी दुनिया और तेरी आंखों में
मेरी दुनिया. बाकी सब इस मासूमियत पर कुर्बान हो जाओ. 14 फरवरी
आने में जब कुछ घंटे बाकी हैं, ऐसे में मुझे फिर से मेरे
स्कूल की चौखट पर ला पटकने के लिए आपको तहे दिल से शुक्रिया.
ये वीडियो मेरे जैसों के लिए भी बाग़ों में बहार है,
जो इस इश्क़ को समझकर भी स्कूल वाली हरकतें नहीं कर सकता. आपको पुन:
बधाई. आपकी पहली फिल्म पर्दे पर आने से पहले आप सुपरस्टार बन गईं हैं. आंखों वाली
अल्हड़ अदा के लिए देश आपका शुक्रगुजार रहेगा.
लेखक - आकाश वत्स
रविवार, 5 नवंबर 2017
चार महीने में ही बदला-बदला सा लगने लगा अपना पटना
छठ पूजा में
अपने गांव राघोपुर(बिहार के मधुबनी जिले से 8 किलोमीटर दूर) जाना हुआ। पटना से होकर ही गांव जाते हैं। हालांकि
हर बार की तरह इस बार भी गांव
में ज्यादा दिन तो नहीं रहा, लेकिन 48 घंटे पटना में गुजारे। इस दौरान बहुत कुछ बदला-बदला सा लग रहा था। सरकार तो पिछली बार आने पर ही बदल
गई थी। जो भी है, जैसा भी है, लेकिन पहले
से पटना बदला-बदला सा लग रहा था।
मैं 21 अक्टूबर को साउथ बिहार एक्सप्रेस ट्रेन से राजेन्द्र
नगर टर्मिनल पर उतरा। स्टेशन से बाहर निकलकर पटना स्टेशन जाने के सड़क क्रॉस
कर ऑटो पकड़ा। जाम होने के कारण फ्लाई ओवर के नीचे करीब आधा घंटा ऑटो
में बैठा रहा। इस दौरान बैठे-बैठे सब चीजों को निहार रहा था। लग रहा था कि बिहार में
अब विकास हो रहा है। वैसे तो मैंने 30 नवम्बर 2016 को रायपुर को अलविदा कह दिया था। पटना में दैनिक जागरण संस्थान में नौकरी की
शुरुआत की, लेकिन ज्यादा दिन नहीं रह पाया। यह भी कह सकते
हैं कि मन नहीं लगा या फिर यह भी कह सकते हैं कि रायपुर वाले बड़े भाई,
छोटे भाई, दोस्त सहित हमसे जुड़े लोगों के प्यार
ने 9 महीने में ही वापस खींच लाया। यह इसलिए
बता रहा हूं क्योंकि रायपुर आने के 4 महीने में बाद पहली बार
घर जाना हो रहा था। पटना स्टेशन के सामने लम्बे समय से आर ब्लॉक
से राजेन्द्र नगर जाने वाले फ्लाइ ओवर का भी काम लगभग पूरा-पूरा
सा हो चुका है। पटना में रहने के दौरान काम के चलते स्टेशन जाना हुआ करता था।
पर सही बताएं तो कभी भी खुश मन से नहीं जाता था, क्योंकि पटना स्टेशन या राजेन्द्र
नगर टर्मिनल स्टेशन जाने के लिए भीड़ का सामना करना पड़ता था, वह भी दो-चार मिनट का नहीं,
बल्कि आधे घंटे या उससे अधिक। वहां लगने वाले जाम में मैं भी अक्सर फंस जाता था। उस फ्लाइ ओवर के दोनों साइड से काम पूरा हो चुका है। स्टेशन के सामने
वाले हिस्से का काम बचा है, जो दिन-रात तेजी से चल रहा है। सही कहूं तो फ्लाइ ओवर बनने
से जाम की स्थिति पूरी तरह खत्म हो जाएगा। गांव की यादें, ट्रेन का सफर सहित अन्य यादगार लम्हों को ‘जनता दरबार’
पर आप से शेयर करुंगा। यह पहली कड़ी थी।
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