रविवार, 1 अक्तूबर 2017

डर सा लगता है कुछ लिखने में


डर सा लगता है कुछ लिखने में। सोचता हूं अगर मैं कुछ लिखता हूं और उसमें कोई गलती हो जाती है तो आप क्या कहेंगे? यही बोलेंगे न कि देखो इसको लिखना भी नहीं आता है और चला है ब्लॉग लिखने। पर मैं आपको बता दूं मुझे आपके बातों का जरा सा भी अफसोस नहीं होगा, क्योंकि मुझे अपनी गलती जानने और उसको सुधारने का एक सुनहरा मौका मिलेगा। वैसे मैं आपको पहले ही बता देता हूं कि मैं हिन्दी का जानकार तो नहीं हूं, पर फिर भी लिखना चाहता हूं। लिखने को अनगिनत टॉपिक है। मैं सुबह उठने से लेकर रात के सोने तक के डेली रूटीन को भी लिखूं तो मुझे बहुत मजा आएगा। आप का पता नहीं, पर कोशिश करुंगा कि आपको भी पढ़ने में मजा आए। मेरे इस ब्लॉग पर आप सभी का दिल से स्वागत है। आज(01 अक्टूबर 2017) से लिखने के सिलसिला का श्रीगणेश करने जा रहा हूं। 

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